Tuesday, 14 August 2012

लम्हों में क़ैद हो गया जैसे सदी का राज़


मेरी इबादतों में छिपा है ख़ुशी का राज़ 
सज़दे बता रहे हैं मिरी बंदगी का राज़ 

ए  रह _रवाने शौक़ संभल  कर क़दम बढ़ा 
तू जानता नहीं है अभी रहबरी का राज़ 

महसूस कर रही हूँ बदन की हरारतें 
मैं जानती हूँ रूह की पाकीज़गी का राज़ 

जो हो सके तो ग़म में ख़ुशी को तलाश कर 
मुमकिन है क़ह्क़हों में मिले ज़िन्दगी का राज़ 

दरदर भटक रही हैं जो मेरी मुसाफतें 
मैं सोचती हूँ क्या है मेरी गुमरही का राज़ 

मिल कर किसी बुज़ुर्ग से महसूस ये हुआ 
लम्हों में क़ैद हो गया जैसे सदी का राज़ 

किसको तलाश करती हैं बीनइयां मिरी 
मुझ पर खुला नहीं है मेरी दीदनी का राज़ 

लोगो ने तेरा ग़म मेरे चेहरे से पढ़ लिया 
महफूज़ रख न पाई 'सिया' आशिकी का राज़ 

miri  ibadatoo'n mein chipa hai khushi ka raaz 
sazde bata rahe hai'n meri bandagi ka raaz 

A reh _rawaane shauq sambhal kar qadam badha 
tu jaanta nahi hai abhi rehbari ka raaz 

mehsus kar rahi hoon badan ki haraarate'n
main jaanti hoon rooh ki paqazagi ka raaz 

jo ho sake to gham mein khushi ko talaash kar 
mumqin hain qahqahoo'n mein mile zindgi ka raaz 

dar dar bhatak rahi hain jo meri musafate'n
main sochti hoon kya hai meri gumrahee ka raaz 

mil kasr kisi bujurg se mehsus ye hua 
lamho'n mein qaid ho gaya jaise sadi ka raaz 

kisko talash karti hai'n beenaiyaa'n miri 
mujh par khula nahi hai meri deedani ka raaz 

logo ne tera gham mera chehre se padh liya 
mehfuz rakh n paayi 'siya' aashiqi ka raaz 

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