Sunday, 23 October 2011

कुछ भी दुनिया में नहीं मिलता मुसीबत के सिवा

कुछ भी दुनिया में नहीं मिलता मुसीबत के सिवा
और कोई राह नहीं राह-ए-मोहब्बत के सिवा

ये अलग बात की मैं बोल दूँ हँस कर सबसे
पर मुझे कुछ नहीं भाता तेरी सूरत के सिवा

बारहा देख के मुझको ये ख्याल आया है
तेरी तस्वीर में क्या रक्खा है हैरत के सिवा

अब न पूछो मेरी ख्वाहिश या तमन्ना का मिज़ाज
शिद्दतें और भी हैं प्यार की शिद्दत के सिवा

तुझ से बस इतनी गुज़ारिश है "सिया " की जानाँ
कुछ न दे मुझको मेरी जान मोहब्बत के सिवा
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