Wednesday, 14 September 2011

अपनी माँ को याद करते हुए एक बेटी ने अपने जज़्बात लिखे हैं


माँ तू साथ हैं मेरे तुझे मेरे हर ग़म की खबर है 
 बिन तेरे है धूप कड़ी और मुश्किल  सफ़र है 

सर पे मेरे आज तेरी ममता की ठंडी छावं नहीं 
कैसे  झुलसा सा मन कैसी ये तपिश का असर है 

रात को सोते हुए ख्वाब से जब मैं  घबरा जाती 
क्यों घबराए  मैं पास हूँ लाडो, किस बात का डर है 

जब से गयी तू मां मैंने कभी ना खाया मन से 
 हाथो में जो स्वाद तेरे, वो ना किसी में  हुनर है 

आज सिया के पास नहीं तू ,तेरी यादे है बाकी 
माँ तुझसा कोई भी तो आता ना नज़र है 

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर और भावुक अभिव्यक्ति है सिया जी....

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