Thursday, 9 June 2011

उफ़ ये कैसी तिश्नगी

ये कैसा प्यार है, उफ़ ये कैसी तिश्नगी है, बताओ मुझे
खुश रहे वो हमपे कायम जब तलक हसीं जमाल रहा

अब तो कुछ पल सुकून के अता भी कर मुझको
हाय गर्दिश में बहोत ही मेरा वो पिछला साल रहा

वर्ना तेरी अदालत में कोई गुनाहगार नहीं बचता
क्यूं वही शख्स गुनाहों से हमेशा ही बस बहाल रहा

तुमने मुझको पराया मान लिया है ये भी क़िस्मत
मेरे ज़ेहन में हमेशा , आपका ही बस ख़याल रहा

सिया

2 comments:

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति

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  2. अब तो कुछ पल सुकून के अता भी कर मुझको
    हाय गर्दिश में बहोत ही मेरा वो पिछला साल रहा

    meri har saans me base ho..phir bhi ho mujhse door q,, mere hothoin pe bas yahi masoom swaal raha !!!

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