Monday, 20 June 2016

झाँक कर देखें मेरी आँखों की ये गहराइयाँ

झाँक कर देखें मेरी आँखों की ये गहराइयाँ
इन में आयेंगी नज़र बस आपकी परछाइयाँ
सिर्फ पीछे मुड़ के देखा है ज़रा सा उम्र ने
हसरतें लेने लगी हैं आज फिर अंगड़ाइयाँ
दिल का ये आलम अभी से क्या है ये मत पूछिये
क्या करेगी सुब्ह तक ये शाम की तन्हाईयाँ
तू गुलिस्तां तू बहाराँ तू ही हैं बादे सबा
फूल ख़ुश्बू रंग क्या हैं सब तेरी परछाइयाँ
इश्क़ में जाता है दिल होशो ख़िरद ताबो तवां
और मिलता भी है क्या ? तन्हाईयाँ रुसवाईयाँ
दर्द फिर से दे रहा है मेरे दिल पर दस्तकें
ऐसा लगता हैं की फिर चलने को है पुरवाइयाँ
jhank kar dekhe'n meri aankho ki ye Gehraiyan
in mein aayegi nazar bus aapki parchaiyan
Sirf peechhe mud ke dekha hai zara sa umr ne
hasraten lene lagi hain aaj phir Angdaiyan
dil ka ye aalam abhii se hai ki kuch mat puchiye
kya karegi subh tak ye Shaam Ki Tanhaiyan
tu gulistaN tu bahaarN tu hi hai baade saba
phool khushbu rang kya haiN/sab teri parchaiyaaN
ishq me jata hai dil hosh o khirad tab o tawaaN
aur milta bhi hai kya ? tanhaiyaN ruswaiyaN
Dard phir se de raha hai mere dil par dastaken
aisa lagta hai ki phir chalne ko 

ik punjabi ghazal


Terian yaadan ne dhaya qahar , das main kee Karaa'n?
faaye lag javaan ki khava zehr das main ki Karaan
Hun kisay v than te teray baajo dil lgda nahi
chadh gaya ankha,n da teri sehr das main ki Karaa'n
Par je honday pohnch jandi main udari mar ke
Tu vasaya door jake shahr das main ki karaa'n
ho gaya sunjha banera kaaN vi hun nayi bolde
rovan kulavan hun atthay pehr das main ki kraa'n
Vekh lai tu aake aape haal hoya ki mera
dil to uthdi dard di ik lahar das main ki karaa'n
تیریاں یاداں نے ڈھایا قہر، دسّ میں کی کراں
پھائے لگّ جاواں کے کھاواں زہر دسّ
میں کی کراں
ہن کسے وی تھاں تیرے باجھوں دل نئیں لگدا
چھڈّ گیا اکھاں دا تیری سحر دسّ میں کی کراں
پر جے ہندے پُہنچ جاندی میں اڈاری مار کے
توں وسایا دور جا کے شہر دسّ میں کی کراں
ہو گیا سنجا بنیرا کاں وی ہن نئیں بولدے
روواں، کُرلاواں ہن اٹھے پہر دس میں کی کراں
ویکھ لے توں آکے آپے حالَ ہویا کی میرا
دل تو اٹھدی درد دی اک لہر دس میں کی کراں
ਤੇਰੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਨੇ ਢਾਇਆ ਕਹਿਰ, ਦੱਸ ਮੈਂ ਕੀ ਕਰਾ ?
ਫਾਏ ਲੱਗ ਜਾਵਾਂ ਕੇ ਖਾਵਾਂ ਜ਼ਾਹਿਰ ਦੱਸ ਮੈਂ ਕੀ ਕਰਾਂ
ਹੁਣ ਕਿਸੇ ਵੀ ਥਾਂ ਤੇਰੇ ਬਾਝੋਂ ਦਿਲ ਨਹੀ ਲਗਦਾ
ਛੱਡ ਗਿਆ ਅੱਖਾਂ ਦਾ ਤੇਰੀ ਸਹਿਰ ਦੱਸ ਮੈਂ ਕੀ ਕਰਾਂ
ਪਰ ਜੇ ਹੁੰਦੇ ਪੋਹੰਚ ਜਾਂਦੀ ਮੈਂ ਉਡਾਰੀ ਮਾਰ ਕੇ
ਤੂੰ ਵਸਾਇਆ ਦੂਰ ਜਾ ਕੇ ਸ਼ਹਿਰ ਦੱਸ ਮੈਂ ਕੀ ਕਰਾਂ
ਹੋ ਗਿਆ ਸੁੰਜਾ ਬਨੇਰਾ ਕਾਨ ਵੀ ਹੁਣ ਨਹੀ ਬੋਲਦੇ
ਰੋਵਾਂ ਕੁਰਲਾਵਾਂ ਹੁਣ ਅਠੇ ਪਹਿਰ ਦਸ ਮੈਂ ਕੀ ਕਰਾਂ
ਵੇਖ ਲੈ ਤੂੰ ਆਕੇ ਆਪੇ ਹਾਲ ਹੋਇਆ ਕੀ ਮੇਰਾ
ਦਿਲ ਤੋ ਉਠਦੀ ਦਰਦ ਦੀ ਇਕ ਲਹਿਰ ਦਸ ਮੈਂ ਕੀ ਕਰਾਂ
ਸੀਆ ਸੱਚਦੇਵ