Thursday, 5 January 2012




उनका शेवा है सदा सब से गुरेज़ाँ होना
बेवफ़ाई पे कभी उनकी न हैरां होना 

तेरी यादो को मेरे दिल में हैं मेहमान होना 
काम मुश्किल हैं मगर इसको हैं आसां होना 

मुझपे इलज़ाम _तराशी में लगे हैं वो लोग 
जिनपे वाजिब था मेरे दर्द का दरमाँ होना 

मैंने इस दिल को जलाया हैं तेरी चाहत में 
अब तो तै हैं तेरी महफ़िल में चरागाँ होना 

ऐसा लगता है उन्हें ख़ूब मज़ा आता है
देख कर एक परेशां का परेशां होना

काम ऐसा न करो उँगलियाँ उठ्ठें तुम पर
और लाजिम हो कभी तुम को पशेमां होना

है कड़ी धूप में बच्चों पे वो साये की तरह
इतना आसां नहीं औरत के लिए माँ होना

तितलिया कैसे पकड़ लू मैं तेरी चाहत की 
तुमको आता ही नहीं मुझपे मेहरबाँ होना

तेरी यादो को मेरे दिल में हैं मेहमान होना 
काम मुश्किल हैं मगर इसको हैं आसां होना 

देख लो उनकी अना का वहीं अंदाज़ है आज
वहीं बेज़ारी वहीं सब से गुरेज़ाँ होना

धूप ये ग़म की जला भी दे मगर हैं मुझको 
अश्क बन कर तेरी आँखों से नुमायाँ होना 

ऐ सिया मेरा उसूलों के डगर पर है सफ़र 
इस सफ़र का कभी मुमकिन नहीं आसां होना



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