Tuesday, 2 August 2011

ख़ुदा का नेक इक बंदा मिलेगा

ज़माना कब कहाँ कैसा  मिलेगा
न तुझसा कोई न मुझसा मिलेगा

बिछड़ के मुझ से तुम को क्या मिलेगा
कहाँ इक दोस्त मुझ जैसा मिलेगा

मेरी आँखों की  जानिब तुम ना देखो
यहाँ मौसम बहोत भीगा  मिलेगा

मेरे कातिल को कोई इतना पूछे
मिटा के मुझको आखिर क्या मिलेगा 

दिलों में प्यार का मौसम रहे तो
खिला हर शाख पर गुंचा मिलेगा 

उसे सब  दिल बातें बोल देंगे
 ख़ुदा का नेक जो इक बंदा मिलेगा 

"सिया " तुम इन दिनों मायूस क्यूं हो 
जिसे देखा बहोत टूटा मिलेगा


1 comment:

  1. बहुत सुंदर
    क्या कहने

    मेरी आँखों की जानिब तुम ना देखो
    यहाँ मौसम बहोत भीगा मिलेगा

    मेरे कातिल को कोई इतना पूछे
    मिटा के मुझको आखिर क्या मिलेगा

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